मानसिक रोगों के लक्षण व उपचार विधि

प्रिय मित्र, वेबसाइट के माध्यम से मैं डॉ.कपिल शर्मा(MBBS, MD SMS Jaipur, ExJr AIIMS Delhi)आपको मस्तिष्क- मानसिक रोग, सेक्स रोग व नशे के रोग के बारे में जानकारी प्रदान कर रहा हूँ| इस वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी को पूरा पढ़ने में मात्र 15-20 मिनट का समय लगेगा अतः इसको पढें और स्वयं का या किसी भी जानकर व्यक्ति के जीवन में आप खुशियों के रंग एक बार फिर से भर सकते हैं|

स्वास्थ्य:

मनुष्य का तन, मन, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से पूरी तरह से फ़िट होना ही स्वास्थ्य है, सीर्फ़ बिमारी नही होना ही स्वास्थ्य नही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार स्वस्थ व्यक्ती के लिए सीर्फ स्वस्थ शरीर की ही जरूरत नही होती है, स्वस्थ मन-मस्तीष्क भी उतना ही जरूरी है। आजकल व्यक्ती शारीरिक रूप से स्वस्थ मिल जाता है लेकिन मानसिक रूप से स्वस्थ मिलना ज्यादा कठिन हो गया है।आगेआने वाला भविष्य सिर्फ और सिर्फ माइंड का है| जिस व्यक्ति का माइंड जितना अच्छा होगा वह इंसान उतना ही सफल साबित होगा| इस टेंशन से भरी जिंदगी में लोग किसी नकिसी प्रकार की मस्तिष्क व माइंड सम्बंधित बीमारी से ग्रस्त हैं| अगर इस में तम्बाकू-बीड़ी, शराब, भांग-गांजा, जुआ व इन्टरनेट के नशे का हिस्सा भी शामिल कर लिया जाए तो मानसिक मस्तिष्क, इमोशनल-साइकोलॉजी के रोगों से पीड़ित व्यक्तियों का प्रतिशत और भी बढ़ जायेगा| इसलिए अपना माइंड/ मस्तिष्क स्वस्थ रहना सबसे ज्यादा जरुरी हो गया है| विकसित देशों में जब अन्य शारीरिक रोग कण्ट्रोल में आगए हैं तो वहाँ पर माइंड व टेंशन के रोग बढ़ रहे हैं| हमारा भारत जैसे-जैसे विकास कीओर बढ़ रहा है यहाँ भी पश्चिमी सभ्यता का असर साफ़-साफ़ दिखाई देरहाहै| लगातार छोटे होते परिवार व कम होता समाज का सहयोग व्यक्ति को माइंड व टेंशन केरोगों कीओर धकेल रहा है|रोग के कारण व्यक्ति काम-काज करने में सामान्य व्यक्ति की तुलना में पिछड़ जाता है और घर की आय में कमी होती है| जो लोग मानसिक रूप से टेंशन/ डिप्रेशन में व नशे के शिकार रहते हैं वो व्यक्ति हाईबी.पी, पेटकीएसिडिटि (तेज़ाब), गैसबनना, अल्सर, जोड़ों के दर्द, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, मोटापे/ दुर्बलता, भूख, नींद के रोगों जैसे शारीरिक रोगों से पीड़ित रहते हैं|

आईये जानते हैं इन रोगों के लक्षण क्या हैं?

डिप्रेशन:

मन उदास रहना, जीवन में आनंद व सुख की कमी लगना, भूख कम या ज्यादा होना, नींद कम आना, ताकत स्फूर्ति की कमी, जल्दी थक जाना, ग्लानिकी भावना रहना, रोना आना, नकारात्मक विचार आना, आत्मविश्वास की कमी होना, आत्महत्या के विचार आना, एकाग्रता(कंसंट्रेशन) की कमी, यादाश्त में कमी, चिड़चिड़ापन, काम करने की इच्छा नहीं होना, लेटे रहने का मन करना, सेक्स में मन नहीं लगना, सेक्स में ताकत नहीं लगना|

बी.पी.डी /उन्माद:

इसको बाइपोलर रोग कहा जाताहै| इसमे रोगी डिप्रेशनव तेजी के समयों के बीच झूलता रहता है| जब डिप्रेशन का दौर आता है तो डिप्रेशन के लक्षण आते हैं और जब तेजी का दौर आता है तो व्यक्ति अधिक बोलना, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, नींद नहीं आना, ज्यादा भाग दौड़ करना, बड़ी-बड़ी बातें करना,खुद को ज़्यादा बड़ा समझाना;जैसे लक्षणों से पीड़ित होताहै|

चिंता/ एंग्जायटी:

इस रोग में व्यक्ति को चिंताएं रहती है| छोटी छोटी बातों की चिंताएं होती रहती है| सीने में धड़कन महसूस होना, पसीना आना, नींद नहीं आना, चिडचिड़ापन, अधिक सोच आना, घबराहट होना, मुह सूखना, हाथ काँपना|

दर्द (सोमेटिकडिसऑर्डर):

सिर दर्द, सिर में भारीपन, शरीर में बिना कारण दर्द रहना/ चबके चलना, सीने में दर्द या जलन रहना|

नशे का रोग:

शराब,बियर, डोडा-पोस्त, अफीम, हेरोइन, स्मैक, गांजा, भांग, बीड़ी-सिगरेट, ज़र्दा-गुटखा, नींदकीगोली, कफसीरप,तेल/ ट्यूबसूंघना, कोकेन, जुए व सट्टे का नशा, इन्टरनेट या विडियो गेम का नशा व अन्य किसी भी तरह का नशा|अधिक नशा करना व नशे के कारण स्वभाव में बदलाव आना, गुस्सा आना, मारपीट करना, नशे के कारण पागलपन होना, नींद नहीं आना, नशे के कारण या नशा छोड़ने के कारण सेक्स सम्बंधित समस्या होना, काम पर नहीं जा पाना|

फोबिया / डर:

इसमे व्यक्ति किसी वस्तु, जानवर या परिस्थिति से डर महसूस करता है, जैसे: बच्चे का स्कूल से डरना, व्यक्ति का भीड़ भाड़ वाली स्थानों से डरना, बंद जगहों से डरना, ऊंचाई से डरना, सामाजिक स्थलों से डरना| व्यक्ति इस मे डर पैदा करने वाली वस्तु/ स्थिति से बचने की कोशिश करता है, जिसके कारण व्यक्ति जीवन में वह असुविधा एंव आत्मविश्वास की कमी महसूस करताहै|

स्किजोफ्रेनिआ:

इस रोग में व्यक्ति के विचार, भावनाये, व्यवहार बदल जाते है| व्यक्ति को किसी भी तरह के शक़ वह महो सकते हैं, जैसे: किसी ने जादू-टोना तंत्र-मंत्र करवा रखा है, जीवन साथी का चरित्र ठीक नहीं है, भूतया आत्माया एलियन से बात कर सकता है, कोई पीठ पीछे बुराई करता है| व्यक्ति को अकेले में आवाज़ें आना, डर लगना, कुछ दिखाई देना, वशीकरण जैसा महसूस होना, गुस्सा/ चिड़चिड़ापन, कन्फ्यूजन होना, नींद नहीं आना, काम में मन नहीं लगना, खुद की देखभाल नहीं करना, समय पर नहाना धोना नहीं, अकेले बैठे बड़बड़ाना, अकेले में मुस्कुराना, एक जगह खड़ा रह जाना, हाथों से इशारे करना| इस रोग के मरीज हमारे समाज में फैले अज्ञानता के कारण घर वाले मरीज़ को स्याणे या टोना-टोटका करने वाले लोगो के पास भटकते रहते हैं|

ओ.सी.डी:

इस मे व्यक्ति को अनचाहे विचार आते हैं| ये विचार आना व्यक्ति को पसंद नहीं होता है| इन आने वाली विचारों से व्यक्ति का मनखिन्न व दुखी हो जाता है| ये विचार कई तरह केहो सकते है,जैसे: हाथ गंदे हैं, कपडे/ घर/ बर्तन पूरी तरह से साफ़ नहीं हैं, ताला/ कुण्डी ठीक से लगाए थे या नहीं, गंदे व अश्लील विचार/ चित्र दिमाग में आना| व्यक्ति इन विचारों को रोकने की कोशिश भी करता है| कई बार व्यक्ति बार बार चेक करताहै, बार बार हाथ/कपडे/ बर्तन/ घर साफ करता है| इस बीमारी के कारण व्यक्ति का काफी समय नष्ट हो जाता है| जिस काम को ठीक से करना चाहता है उस काम को ठीक से नहीं कर पाते हैं|

सेक्स के रोग:

नामर्दी/नपुंसकता,लिंग में तनाव कम आना,शीघ्रपतन/जल्दी वीर्य निकलना,सेक्स इच्छा में कमी,बचपन में कि ये गए सेक्स सम्बंधित प्रयोगों से नुकसान महसूस होना,सेक्स में आनंद की कमी,सेक्स के अंत में चरम सीमा तक तक नहीं पहुचपाना (विशेषकर महिलाओं में),सेक्स के समय तरल चिकनाई कम होना,नशे या दवा के कारण किसी भी तरह के सेक्स रोग का उत्पन्न होना|

एडजस्टमेंट डिसऑर्डर:

व्यक्ति के जीवन में किसी घटना (विवाह, बीमारी, एक्सीडेंट, दुर्घटना, नुकसान,जगह में परिवर्तन) के बाद व्यक्ति अपने सामान्य जीवन से ताल मेल नहीं बिठा पता है| इसमे व्यक्ति डिप्रेशन व चिंता जैसे लक्षणों से पीड़ित हो सकता है|

कन्वर्शन:

ये रोग महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है| इस रोग में व्यक्ति की हरकतें अजीब हो जाती हैं| रोगी की बत्तीसी/ जबड़े टाइट बंद होना, दौरे आना, उलटी-सीधी बातें करना, शरीर में कुछ भरना, लकवे जैसा मारना,यादाश्त चले जाना| ये रोग अधिकतर तब पाया गया है जब व्यक्ति किसी भी तरह के मानसिक या शारीरिक तनाव की स्थिति से गुजरती है लेकिन हमेशा तनाव की स्थिति मिले ये भी जरुरी नहीं है|

नींद के रोग:

रात में डरना, नींद में चिल्लाना, नींद में उठकर चलना, कपड़ों में पेशाब करना, नींद नहीं आना, अधिक नींद आना, पैरों में सडप चलना|

खाने से सम्बंधित रोग:

कम खाना /अधिक खाना, चाक/ मिटटी/ कोयला खाना|

मिर्गी के दौरे आना:

बेहोशी आना, मुह/ हाथ-पैर मुड़ जाना, कई बार कपड़ो में पेशाब भी निकल जाता है, जीभ दांतों से कट जाना जैसे लक्षण आते हैं|

डिमेंशिया:

बुढापे में (50-60 की आयु के बाद) व्यक्ति की मेमोरी कमजोर होना, स्वयं की देखभाल नहीं कर पाना, काम ठीक से नहीं कर पाना, भूलना, पहचानने में दिक्कत होना, रास्ता भूलना, खाना खाने के बाद भूलना, चिड़चिड़ापन, व्यवहार बदलना, चिंता फ़िक्र होना, डर लगना, नींद में दिक्कत|

सिर की चोट या लकवे के बाद व्यवहार बदलना:

कई बार सिर की चोट या लकवा मारने के बाद व्यक्ति का स्वभाव व्यवहार बदल जाता है, व्यक्ति का चिड़चिड़ा होना, नींद में दिक्कत होना, मेमोरी कमजोर होना, खुद की देखभाल नहीं कर पाना, शक्की स्वभाव होना जैसे लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं|

ट्राइकोटिलोमेनिया:

इस रोग में व्यक्ति अपने शरीर (सिर, पलक या अन्य जगह के बाल) के बालों को उखाड़ता है| कई बार व्यक्ति बालों को चबाना या निगलने जैसी हरकत भी करता है|

बच्चों से सम्बंधित दिक्कतें:

बच्चों की स्कूल, व्यावहारिक, बुद्धी, पढाई लिखाई मे होने वाली समस्याएं दिन प्रतिदिन बढ़ रही हैं। बच्चो मे कई तरह की सायकोलोजिकल और व्यावहारिक समस्याएं होती है।

ए.डी.एच.डी / अतिचंचलता-ध्यान की कमी:

इसमे बच्चा अधिक चंचल होता है, वह एक जगह शांत नही बैठता है।उछल कूद करना, दूसरे बच्चों को डिस्टर्ब करता रहता है।बच्चे का ध्यान (कन्सन्ट्रेशन)की पावर कमजोर होती है।पढाई मे ज्यादा समय तक ध्यानपूर्वक बैठ नही पाता है। अधिक उछल कूद व पढाई मे कमजोर होने के कारण स्कूल से भी शिकायत आ सकती है। अधिक उछल-कूद करने के कारण कई बार बच्चे को चोट भी लग जाती है|

ओ.डी.डी / विद्रोही-अवज्ञाकारी बच्चा:

इसमे बच्चा गरम स्वभाव का होता है।अपने से बडो के साथ तर्क-वितर्क करता है।बडो के द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशो कि पालना नही करता है, बल्कि उनका विरोध भी कर सकता है। गुस्सा या चिडचिडापन रहना भी देखा गया है।दूसरो को कई बार चिढाता भी है। ज्यादातर ये व्यवहार घर पर ही दिखाता है लेकिन स्कूल मे भी इस तरह का व्यवहार दिखा सकता है।

कन्डक्ट प्रोब्लम:

इसमे बच्चा ज्यादा स्तर की व्यावहारिक दिक्कते दिखाता है। चोरी करना, तोडफ़ोड करना, नीयम कायदे तोडना, गुस्सा करना,मार पिटाई लडाई करना,गन्दी व अश्लील भाषा का प्रयोग करना जैसे लक्षण दिखाता है। ए.डी.एच.डी, ओ.डी.डी.वकन्डक्ट प्रोब्लम से पीडित बच्चे का अगर सही समय पर ईलाज़ नही करवाया जाए तो वयस्क अवस्था मे बच्चा बडे अपराध व नशे की ओर अग्रसर हो जाता है।क्यूकि ऐसे बच्चे पढाई मे अपना ध्यान नहि लगा पाते है और इन रोगो से पीडित बच्चे अपने ही तरह के शरारती बच्चो की ओर आकर्षित होते है।

बुद्धी की कमी:

इस स्थीति मे बच्चे की आई.क्यू. (बुद्धी) सामान्य बच्चो से कुछ कम होती है।बच्चा पढाई मे अन्य बच्चो से पिछडने लग जाताहै। पढाई लिखाई मे ज्यादा याद नही रहता है, मेमोरि कमजोर होती है। कई बार बच्चा फ़ेल भी हो जाता है, बच्चे में भोलापन होता है।

एस.एल.डि / सीखने में कमजोरी:

इस रोग मे बच्चा बुद्धी मे तो ठीक पाया गया है लेकिन किसी एक या दो सब्जेक्टों मे कमजोर होता है जैसे- मैथ्स (गणित),राईटिंग (लिखने) मे|

औटीज्म:

इस रोग मे बच्चा सामाजिक व्यवहार मे कमी दिखाता है। लोगो से मिलने जुलने मे कम रूची रखता है। लोगो से नजरे मिलाकर बात नही करता है। क्रियाए रिपीट करता है।कई बार बच्चा बोलना भी देरी से शूरू करता है, चिड़चिड़ापन, नींद में दिक्कत।

टिकडिसऑर्डर:

इस मे बच्चा/ व्यक्ति बेमतलब की हरकतें करता है, जैसे: आँखें मिचकाना, होंठ मरोड़ना, मुहसे आवाज़ें निकालना, अजीब से चेहरा बनाना, बालों की लटें गोल गोल बनाना| बच्चे व बच्चे के माता-पिता की काउंसलिंग का बहुत अधिक लाभ होता है। आवश्यकता होने पर दवाईयो की मदद से इस तरह के बच्चे के रोगों का मैनेजमेन्ट किया जाता है। इसमे बच्चे का वर्तमान ही नही बल्कि पूरा भविष्य जुडा रहता है।

शादी व घर परिवार में चलने वाली कलह क्लेश के कारण:

प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तित्व दूसरे व्यक्ति से अलग होता है, कोई भी दो इंसान एक जैसे नही होते है| जब दो अलग अलग व्यक्तित्व के इंसान एक दूसरे के संपर्क में आते हैं तो वो विचारों का आदान प्रदान करते हैं| एक दूसरे से मिलते जुलते व्यक्तित्व के इंसानो की जोड़ी एक दूसरे के साथ ख़ुशी के साथ रह सकती है, लेकिन जब एक दूसरे से अलग विचार वाले इंसान एक दूसरे से मिलते हैं तो उन मे वैचारिक मत भेद होते हैं| कई बार ये मतभेद एक दूसरे से इतने अलग हो जाते हैं की पति-पत्नी, माता-पिता व संतान आपस में एक दूसरे की आशाओं परखरे नही उतर पाते हैं| समय के साथ साथ ये समस्या बढ़ती जाती है| ये परेशानी व्यतित्व (पर्सनलिटी) की होती है इसलिए समस्या पैदा करने वाला इंसान अपनी भूमिका को समझ नहीं पाता है| पर्सनलिटी की प्रॉब्लम (पर्सनलिटीडिसऑर्डर) होने के कारण घर में वह व्यक्ति और घर के सदस्य भी परेशान रहते हैं| घर का सुख पूर्वक जीवन क्लेश का स्थान बन जाताहै| लगातार चलने वाली तू-तूमैं-मैं की वजह से घर के लोग सुखी नहीं रह पाते हैं और समाज में लगातार तलाक/ डाइवोर्स के केस बढ़ते जा रहे है| पुरुष नशे के शिकार हो जाते हैं व महिलायें डिप्रेशन में आ सकती हैं| पति-पत्नी में क्लेश के कारण वो एक दूसरे पर विश्वास करना कम कर देतेहैं| एकदूसरे से दु:खी होकर कई बार मारने मरने की धमकी देते हैं| कई बार सुसाइड / आत्महत्या तक के प्रयास कर बैठते हैं| नींद की गोली खाना, गले में फंदा लगाना, ज़हर खा लेना, नसें काट लेना जैसे कदम उठा लेतेहैं|

पर्सनलिटीडिसऑर्डर (व्यक्तित्वकारोग):

कई तरह के होते हैं, कुछ इंसान बहुत ज्यादा शक्की व हमी होते हैं| ये लोग अपने जीवन साथी के चरित्रव आचरण पर शक करते हैं| कुछ लोग गुस्सेल स्वभाव के होते हैं| कुछ लोग बेतुकी और अजीब तरह की बातें करते हैं जो दूसरे को हज़म नहीं होती हैं| कुछ लोगों का मूड जल्दी बदलता रहता है, ये मूडी किस्म के लोग होते हैं| कुछ लोगो को काम बहुत ज्यादा चतुराई से करना होता है, इसमें वो ज़रा भी कोम्प्रोमाईज़/ समझौता नहीं करते हैं| अधिक चतुराई से काम करने के कारण रोगी सिर्फ अपने जीवन में ही नही बल्कि दूसरों के जीवन में भी परेशानी खड़ी कर देता है| कुछ लोग असामाजिक कार्य करने में नहीं हिचकिचाते हैं जैसे लड़ना, झूठ बोलना, चोरी करना, नियम व कानून तोडना, चीजें तोड़-फोड़ करना, नशा करना इत्यादि| इन सभी पर्सनलिटीडिस ऑर्डर्स के चलते हुए व्यक्ति व उसके आसपास के जानकार लोग परेशान व दु:खी रहते हैं, परंतु रोगी को इस रोग की भनक नहीं होती है| इसलिए वह रोग का इलाज़ करवाना उचित नहीं समझता है और जीवनभर दु:खी रहता है|

इलाज़ के लाभ…

मनुष्य का जीवन हम सबको आनंद ख़ुशी व स्वस्थ रहने के लिए मिला है| सेक्स रोग, मस्तिष्क-मानसिकरोग, नशे के रोग के कारण सिर्फ उस व्यक्ति का ही जीवन नहीं बल्कि पुरे परिवार का जीवन दुखमयी से सुखमयी जीवन में बदला जा सकताहै| जीवन में फिर से खुशियां व जोश भरा जा सकता है| डॉ. कपिल शर्मा(एम.बी.बी.एस, एम.डी.) के क्लिनिक पर काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध है, जिसमे रोगियों को उनके रोग से सम्बंधित हर एक समस्या का समाधान किया जाता है, और जरुरत होने पर दवाईयों का उपयोग किया जाता है| इलाज़ से सिर्फ वर्तमान ही नहीं बल्कि व्यक्ति व परिवार का पूरा भविष्य सुधारा जा सकता है|

मानसिक रोगों से सम्बंधित गलत धारणाएं:

मानसिक रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में छूने से, पास बैठ नेसे, साथ में खाना खाने से, शारीरिक सम्बन्ध बनाने से नहीं फैलते हैं| रोगी को स्याणे से तंत्र-मंत्रसे, मारपीट से, चिढाने से बचाएं और समाज में जागरूकता फैलाएं|

किसी भी रोगी के ठीक होने के लिए कई सारे कदम उठाने पड़ते हैं| रोगी कई स्टेज से गुजरता है…

अन्धकार की स्थिति:

इसमें रोगी को यह ज्ञान नहीं होता है कि वह किसी मानसिक मस्तिष्क इमोशनल साइकोलॉजिकल व नशे के रोग से पीड़ित है| उसको जब इलाज के लिए बोला जाता है तो वह मना कर देता है|

जाग्रति:

बार बार जीवन में आने वाली परेशानियों से झुझता रहते हुए जब कई लोग उसको यह सलाह देते हैं या वह किसी पत्रिका या अखबार में इसके बारे में ज्ञान पाता है तो उसको समझ आता है कि उसको इलाज़ करवाना चाहिए|

तैयारी:

रोगी अपने रोग से लड़ने के लिए तैयारी करता है| इसके लिए वह परिवार व दोस्तों कि मदद लेता है, व सेक्स-मानसिक-मस्तीष्क व नशा मुक्ति रोग विशेषग्य से मिलने की तैयारी करता है।

पुनर्निर्माण:

रोग के कारण जीवन में होने वाले नुकसान की भरपाई की जाती है| इसमें रोगी के साथ में उसका मनोचिकित्सक,घरवाले और दवाईयां सब मिलाकर रोग के विरुद्ध लडायी लड़ते हैं|

वृद्धि:

रोग से मुक्ति पाने के बाद व्यक्ति का जीवन आनंद व सुख से भर जाता है| व्यक्ति के परिवार में समाज में कामवाली जगह पर सब के साथ रिश्ते अच्छे हो जाते हैं| काम में मन लगने लग जाताहै| घर कि आय बढ़ती है|

मस्तिष्क-मानसिक रोग, नशे का रोग एक ऐसा रोग है जो पुरे परिवार को तबाह कर देता है| परन्तु अगर सही समय पर मस्तिष्क मनसिक, नशे व सेक्स रोग जैसे रोगों का इलाज कर लिया जाये तो जीवन मे खुशी फ़िर से पाई जा सकति है। इन सभी समस्याओ के इलाज मे शर्म व झिझक महसूस नही करे। समाज मे फैली हुई गलत धारणाओ के चलते हुए रोगी अपना ईलाज करवा ने मे सन्कोच करता है। इस सन्कोच ग्लानी और दुख: भरी जिन्दगी से बाहर आयें । सेक्स रोग, मस्तीष्क-मानसिक रोग व नशे के रोग मे व्यक्ति व समाज उस रोगि को उस रोग के लिए जिम्मेदार समझते हैं और कई बार उसकी मजाक भी बनाते हैं जिस के कारण रोगि ईलाज करवा ने मे आनाकानि व हिचकिचाहट करता है, परन्तु जब कोई व्यक्ति अगर दिल, पेट, हड्डी, केन्सर रोगो से ग्रस्त होता है तो यही समाज उस को सहानुभूतिव मदद देता है। अग्यानता के कारण रोगी व समाज ईलाज़ मे बाधा बन जाते है।

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आपका मित्र

डॉ.कपिल शर्मा (एम.बी.बी.एस, एम.डी.जयपुर)

फोन:7619710155 , 263, तारानगर-A, खिरनी फाटक रोड़, गणेश मंदिर के पास, रिलायंस फ्रेश के सामने, झोटवाड़ा, जयपुर